लिंबडी शहर में सिल्क पटोला बनाने वाले वणकर भाई-बहनोंका मेला लगा

 लिंबडी में सिल्क पटोला बनाने वाले वणकर भाई-बहनों का  विवर मेला लगा








पारंपरिक सिल्क बुनाई सेक्टर को मजबूत करने, टेक्नोलॉजी के बारे में जागरूकता पैदा करने और पटोला सिल्क कारीगरों की रोजी-रोटी में मदद करने के मकसद से, 16 मार्च को गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के लिंबडी में पटोला सिल्क बुनकरों के लिए एक बुनकर मेला सफलतापूर्वक लगाया गया। यह इवेंट भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के तहत आने वाले सिल्क टेक्निकल सर्विस सेंटर (STSC), सेंट्रल सिल्क बोर्ड, जम्मू ने आयोजित किया था। इस इलाके के अलग-अलग बुनाई क्लस्टर से बड़ी संख्या में पटोला सिल्क बनाते हुवे वणकर भाई बहनोंने मेले में जोश के साथ हिस्सा लिया। यह इवेंट बुनकरों, टेक्निकल एक्सपर्ट्स और सरकारी अधिकारियों के बीच बातचीत के लिए एक ज़रूरी प्लेटफॉर्म के तौर पर काम आया, जिससे सिल्क प्रोसेसिंग की बेहतर तकनीकों, क्वालिटी बढ़ाने और सिल्क इंडस्ट्री को मजबूत करने के मकसद से किए जा रहे अलग-अलग डेवलपमेंट के कामों के बारे में जानकारी फैलाई जा सकी। इस इवेंट में कई जाने-माने लोग और अलग-अलग डिपार्टमेंट के अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने अपने कीमती विचार शेयर किए और बुनकरों को पटोला सिल्क बुनाई की रिच विरासत को बचाते हुए बेहतर टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए बढ़ावा दिया। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक-सी डॉ. महेश डी. एस., कपड़ा आयुक्त कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारी ए. के. चापेकर, कपड़ा आयुक्त कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारी गिरीश नायर, बुनकर सेवा केंद्र (डब्ल्यूएससी) के सहायक निदेशक एच. बी. गोहिल, जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) के उपायुक्त कुमार लखटारिया, राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम (एनएचडीसी) के वरिष्ठ अधिकारी सिद्धेश सारंगी, बागवानी विभाग के उप निदेशक जे. डी. वाला, एपीएमसी मार्केट के निदेशक शंकरभाई दलवाड़ी, पद्मश्री पुरस्कार विजेता परमार लवजीभाई नागजीभाई, आलोकसिंघ (जम्मू) , भारत भूषण (जम्मु), कई लोग शामिल थे. स्टॉल पर हिस्सा लेने वाले  विज़िटर्स ने काफ़ी दिलचस्पी दिखाई, जिससे उन्हें आजकल के डिज़ाइन, मार्केट ट्रेंड और पटोला सिल्क प्रोडक्ट्स की पहुँच बढ़ाने के मौकों का कीमती अनुभव मिला।प्रोग्राम के दौरान, जाने-माने लोगों ने भारत के जाने-माने पारंपरिक टेक्सटाइल क्राफ़्ट में से एक के तौर पर पटोला सिल्क की अहमियत पर ज़ोर दिया और वणकर समाज भाईको  प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार टेक्निकल गाइडेंस, इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट और स्किल डेवलपमेंट की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।जाने-माने लोगों ने सेंट्रल सिल्क बोर्ड द्वारा ऐसे आउटरीच प्रोग्राम आयोजित करने की पहल की तारीफ़ की और कहा कि ऐसे प्रोग्राम वणकर भाई - बहनों को मज़बूत बनाने, पारंपरिक क्राफ़्ट को बचाने और देश में सिल्क सेक्टर के विकास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं


दीपकसिंह वाघेला, लिंबडी संवाद दाता

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